ममता खींच रही अलग लकीर – Mamata Banerjee Congress statement

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Mamata Banerjee Congress statement
  • पहले भाजपा अब कांग्रेस को भी मानने लगी है अछूत
  • वामदलों की तरह केंद्र से दूरी बनाकर चल रही दीदी 

राष्ट्रीय मुद्दों को किया घोषणा पत्र में शामिल

पश्चिम बंगाल देश की मुख्यधारा की सियासत से कुछ हद तक अलग रहा है। 1962 से 2003 तक यहां उठे वामपंथी आंदोलन की उफान ने बंगाल की केंद्र से इतनी दूरी बढ़ा दी थी, कि राज्य चौतरफा बिछड़ता चला गया। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे कई राज्य बंगाल से आगे निकल गए आजादी से पहले बंगाल जो देश के औद्योगिक मानचित्र में सबसे ऊपर था, वह बगावती ट्रेड यूनियनों के लगातार आंदोलन पिछड़ गया।

अंत में राज्य से पूंजी और श्रम का भी पलायन हुआ। 2011 में सत्ता बदली और 34 वर्षों के वाम शासन का अंत हुआ तो लगा की स्थिति बदलेगी, लेकिन मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी (दीदी) भी वामपंथियों की राह पर चल पड़ी व केंद्र में सत्तारूढ़ दलों से दूरी बनाकर अलग लकीर खींच कर राष्ट्रीय फलक पर जाने की कोशिश में है। यही वजह है, कि सिर्फ बंगाल में सत्तारूढ़ होने के बावजूद सुश्री बनर्जी ने राष्ट्रीय मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल किया है। 

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2011 में सत्ता में आने के महज 1 वर्ष बाद ही कांग्रेसी नीति बंधन और केंद्र सरकार के खिलाफ मुकर गई 2014 में जब से केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनी। तब मोदी के खिलाफ ममता का आक्रामक रुख जगजाहिर है। इसके बाद से ममता भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी रखने की बातें कहती रही। 

कांग्रेस को लेकर, ममता का अलग बयान 

पिछले 1 वर्ष में कांग्रेस के प्रति ममता के रूप में थोड़ा बदलाव आया था, लेकिन लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद स्थिति फिर बदल चुकी है। यही वजह है, कि बुधवार को ममता ने अपनी पार्टी के घोषणापत्र जारी करते समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बच्चा कहते हुए उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया तक  देने से इंकार कर दिया ममता को पता है, कि केंद्र में कांग्रेस व भाजपा को अलग रखकर तीसरे मोर्चे की सरकार बनाना आसान नहीं है।

बावजूद इसके उन्होंने यूनाइटेड इंडिया का अपने घोषणा पत्र में उल्लेख किया साथ ही ऐसे वायदे किए कि यदि उनके फ्रंट की सरकार बनती है। तो नोटबंदी की जांच जीएसटी की समीक्षा और योजना आयोग को फिर से बहाल करना कश्मीर में शांति लौटाने वह पूरे देश की आस्था व विश्वास अर्जित कर उज्जवल भविष्य की ओर आगे बढ़ने की बातें कही गई।

यही नहीं यूनाइटेड इंडिया के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम तक बनाने का घोषणा पत्र में ऐलान किया है यानी दीदी को भरोसा है कि चुनाव बाद स्थिति बदलेगी। 

यहां एक बात यह भी है कि अगर फिर से केंद्र में राजग या संप्रग पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनती है, तो फिर ममता क्या करेंगी?? क्या हुआ फिर से संपर्क में शामिल होगी?? यदि राजग की सरकार बनी तो फिर क्या वाह उसी तरह से विरोध करती रहेंगी और अलग लकीर खींच कर चलती रहेंगी अगर ऐसा होता है तो बंगाल के लिए सही नहीं होगा। 

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